हर जातक की अपनी एक व्यवहारिक विशेषताए होती हैं| जन्मपत्री जो की चन्द्र राशी के द्वारा बनती हैं, और साथ ही साथ सूर्य राशी जो की जातक जिस महीने जन्म लेता हैं उसके आधार पर निर्धारित होती हैं| यह इन दोनों का मिश्रण हैं, जो एक अलग ही खुबी प्रदान करता हैं, और बाकि सभी लोगो से जुदा करता हैं|
लाखों की मात्रा में हर महीने लोग पैदा होते हैं, परंतु तब भी सब अपने आप मे एक अलग ही विशेषता लिए होते हैं| चाहे वो उनका बोलने का तरीका हो – सोचने का तरीका हो – उनका व्यवहार हो – उनका सामाजिक आचरण हो – यह सबका अलग होता हैं| और इनकी बहुत साधारण सी हकीकत हैं की चन्द्र राशी और सूर्य राशी मे ऐसे बहुत से संयोग हैं जो किसी भी जातक की ज़िन्दगी को एकजूट करती हैं| इन दोनों को अच्छी तरह से मिलाकर, किसी भी जातक के बारे मे बताना बहुत आसान हो जाता हैं|
सूर्य जातक की आत्मा को दर्शाती हैं तो चंद्रमा जातक के दिमाग को दर्शाता हैं| तो इस प्रकार से एक जातक की आत्मा का वर्णन, वो किस महीने पैदा हुआ उससे पता चलता हैं (हालाँकि, सूर्य जन्म-पत्रिका मे कहाँ बैठा हैं इस बात की भी अपनी एक बहुत बड़ी भूमिका मौज़ूद हैं), क्यूंकि सूर्य राशी का हिसाब सूर्य की स्तिथि से, मतलब सूर्य किस महीने कौन सी राशी में बैठा हैं| वही दूसरी ओर जातक के दिमाग की गणना उसकी जन्मपत्री में चंद्रमा की स्तिथि के आधार से होती हैं|
यह आत्मा और दिमाग ही हैं, जो किसी भी जातक को बाकि सभी भीड़ से अलग करता हैं| और यह सभी की लिए अत्यधिक आवश्यक हैं की वो अपने आप से जुड़े रहे | चाहे वो ज्योतिष के माध्यम से पूरा हो, चाहे सूर्य राशी के बारे में जानने से पूरा हो | या बिलकुल अलग रास्ता चुनने से हो, जैसे की चिंतन करने जैसा साधारण व गहरा मार्ग | चाहे कोई भी मार्ग चुना जाए, सभी रास्ते खुद की खोज के लिए ही होते हैं|
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